11 मार्च 2024 की तारीख भारतीय इतिहास में एक निर्णायक मोड़ बनकर उभरी, जब केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के नियमों की अधिसूचना जारी कर इसे जमीन पर उतारने का रास्ता साफ किया। संसद द्वारा इस चर्चित कानून को पारित करने के चार साल बाद आई यह अधिसूचना उन गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए नई उम्मीद लाई है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत की शरण में आए थे।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति ने 12 दिसंबर 2019 को ही इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद इसने अधिनियम का रूप ले लिया था। हालांकि, इसकी राह कानूनी चुनौतियों से भरी रही और इसकी संवैधानिक वैधता को परखने के लिए अब तक 200 से अधिक याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इन कानूनी चुनौतियों को पेश करने वालों में आईयूएमएल के साथ-साथ कांग्रेस के जयराम रमेश, आरजेडी के मनोज झा, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जैसे दिग्गज चेहरे शामिल हैं।
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