‘नीले आकाश का सच’: बिहार-झारखंड की सत्ता, घोटाला और उम्मीदों का आईना
वरिष्ठ पत्रकार अमरेन्द्र कुमार की किताब, रामबहादुर राय ने किया विमोचन
पटना: सत्ता की गलियारों में फैले भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग की जटिल सच्चाइयों को उजागर करती वरिष्ठ पत्रकार अमरेन्द्र कुमार की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘नीले आकाश का सच’ का विमोचन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने किया। यह पुस्तक केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसे पत्रकार की यात्रा का वर्णन है, जो सत्ता के फैसलों की तह तक जाता है और बताता है कि कैसे घोटालों की गूंज लोकतंत्र के स्तंभों को हिला देती है और जनता की उम्मीदें राजनीतिक समीकरणों में खो जाती हैं।
झारखंड का जन्म और आदिवासी नेताओं की उपेक्षा
पुस्तक की शुरुआत ‘बिहार विभाजन और झारखंड गठन’ से होती है, जो झारखंड आंदोलन की पृष्ठभूमि, उसके संघर्ष और राज्य निर्माण की राजनीतिक खींचतान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार झारखंड के कद्दावर आदिवासी नेता करिया मुंडा राजनीतिक समीकरणों के चलते अंतिम क्षणों में मुख्यमंत्री पद से वंचित रह गए और बाबूलाल मरांडी राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने।
पशुपालन घोटाला: बिहार की राजनीति पर गहरा प्रभाव
‘पशुपालन घोटाला और लालू प्रसाद’ शीर्षक के तहत, बिहार की राजनीति के सबसे बड़े भ्रष्टाचार की कहानी बयान की गई है। पुस्तक विस्तार से बताती है कि कैसे करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से फर्जी बिलों और घोटालों के माध्यम से निकाले गए और इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति का चेहरा कैसे बदल दिया।
सत्ता के हास्य-व्यंग्य और रिपोर्टिंग का अनुभव
‘लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के रोचक किस्से’ बिहार की सत्ता के दिलचस्प और कभी-कभी हास्यपूर्ण पहलुओं को उजागर करते हैं। ये किस्से राजनीति के मानवीय और नाटकीय दोनों रूपों को दर्शाते हैं। वहीं, ‘सचिवालय का सच और रिपोर्टिंग की यात्रा’ में लेखक ने सरकारी फाइलों, प्रशासनिक गड़बड़ियों और जमीनी रिपोर्टिंग के अपने अनुभवों का विस्तृत वर्णन किया है।
झारखंड का बिहार से सबक न लेना
‘बिहार के घोटालों से नहीं सीख लिया झारखंड ने’ शीर्षक वाले अध्याय में बताया गया है कि कैसे नए राज्य झारखंड ने बिहार की गलतियों को दोहराया। भ्रष्टाचार, गुप्त फंड के दुरुपयोग और सत्ता की राजनीति ने जनता की उम्मीदों को धूमिल करने का काम किया।
मुख्यमंत्रियों का सफर: विकास बनाम राजनीति
पुस्तक के अंत में ‘द गार्डियंस: बाबूलाल से हेमंत तक’ झारखंड की राजनीतिक यात्रा का एक सटीक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें राज्य के मुख्यमंत्रियों की भूमिका, उनके निर्णय और विकास बनाम राजनीति की जंग का चित्रण है।
नीले आकाश की तलाश
‘नीले आकाश का सच’ बिहार और झारखंड की राजनीति की उस कहानी को बयां करती है, जहाँ सत्ता की सच्चाई, घोटालों की गंध और उम्मीदों के नीले आकाश की तलाश एक साथ चलती है। पुस्तक यह भी बताती है कि कैसे लालू प्रसाद देश का प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते थे, पर क्यों और कैसे वे अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए सहमत हुए। साथ ही, शिबू सोरेन जैसे महत्वपूर्ण नेताओं को सत्ता से दूर रखने और उनके साथ हुए छल-कपट की भी पड़ताल की गई है।
रामबहादुर राय ने विमोचन के अवसर पर कहा, “जैसे आकाश में बादलों के बीच भी मौसम का सही अनुमान लगाया जा सकता है, उसी तरह इस किताब में भ्रष्टाचार को तमाम बाधाओं के बीच उजागर करने की कोशिश की गई है। सच को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।” यह पुस्तक उन सभी के लिए पठनीय है जो बिहार और झारखंड की राजनीति की गहरी सच्चाइयों को समझना चाहते हैं।
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